मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्वत

मध्य प्रदेश की पर्वत श्रृंखलाएँ

(सतपुड़ा–मैकाल रेंज एवं विंध्य पर्वत श्रृंखला)
मध्य प्रदेश भारत के प्रायद्वीपीय पठार का हिस्सा है। यहाँ विभिन्न भौगोलिक विक्षोभों के कारण पठार, पर्वत श्रृंखलाएँ एवं नदी घाटियाँ निर्मित हुई हैं। MP में दो प्रमुख पर्वत श्रृंखलाएँ हैं—
विंध्य पर्वत श्रृंखला
सतपुड़ा–मैकाल पर्वत श्रृंखला

1. विंध्य पर्वत श्रृंखला प्राचीन सप्तकूल पर्वत (Vindhya Mountain Range in MP)

मुख्य विशेषताएँ
प्राचीन काल में विंध्याचल पर्वत श्रृंखला को ‘सप्तकूल पर्वत’ के नाम से भी जाना जाता था।
भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक — हिमालय से भी पुरानी।
मालवा पठार के दक्षिण में, नर्मदा नदी के उत्तर में स्थित अवशिष्ट वलित पर्वत।
रचना — सिलिका, सैंडी रेड स्टोन और क्वार्ट्ज
सबसे ऊँची चोटी: सद्भावना शिखर (कालू मार शिखर) – 752 मीटर उत्तर भारत और प्रायद्वीपीय भारत की भौगोलिक सीमा दर्शाती है।
विस्तार : गुजरात से होकर उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ तक
ऊँचाई : 450 से 1100 मीटर

नदी तंत्र

विंध्य श्रृंखला गंगा की दक्षिणी सहायक नदियों को जन्म देती है—
चंबल, बेतवा, केन, टोंस
अन्य: कालीसिंध, पार्वती

विंध्य की दो शाखाएँ

राज्य के बारे में
राज्य का दर्जा: 1 दिसंबर 1963
भारत का 16वाँ राज्य
सीमाएँ:
पश्चिम/उत्तर-पश्चिम – असम
पूर्व – म्याँमार
दक्षिण – मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश

मुख्य चोटियाँ (MP में)

मध्य प्रदेश की विंध्य पर्वतमाला में कई महत्वपूर्ण चोटियाँ स्थित हैं, जिनमें सिगार चोटी (881 मीटर) सबसे ऊँची है, जो मालवा–इंदौर क्षेत्र में पाई जाती है। इसके बाद जानापावा चोटी (854 मीटर) आती है, जो भी मालवा–इंदौर क्षेत्र में ही स्थित है और ऐतिहासिक एवं पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है। मालवा क्षेत्र की ही एक अन्य प्रमुख चोटी धजरी (810 मीटर) है, जो अपनी प्राकृतिक संरचना और भू-आकृतिक विशेषताओं के कारण उल्लेखनीय है। इसके अतिरिक्त सद्भावना चोटी, जिसे कालूमार या काल-अम्बा के नाम से भी जाना जाता है, दमोह जिले में स्थित है और इसकी ऊँचाई लगभग 752 मीटर है। ये सभी चोटियाँ विंध्य पर्वतमाला की संरचना, ऊँचाई के अंतर और क्षेत्रीय विविधता को दर्शाती हैं।

तथ्य

टॉलेमी ने इसे Vindhyas / Vindhyas कहा।
राष्ट्रगान में विंध्य और हिमालय दोनों का उल्लेख है।
मालवा पठार का दक्षिणी किनारा विंध्य का हिस्सा माना जाता है।

2. कैमूर पर्वत श्रृंखला (Kaimur Range)

विंध्य पर्वतमाला की उत्तरी–पूर्वी शाखा। स्थान और विस्तार MP के जबलपुर जिले से शुरू होकर बिहार के रोहतास तक रीवा, सतना, सीधी क्षेत्र शामिल मुख्य बिंदु लंबाई: 483 किमी प्रमुख नदियाँ: रिहंद, टोंस, केन, दुर्गावती प्रसिद्ध जलप्रपात:
पुरवा फॉल (टोंस नदी)
चचाई फॉल (बीहर नदी, 130 मी — MP का सबसे ऊँचा)
केवटी फॉल
ओड्डा फॉल
गठन: मेटामॉर्फिक रॉक + उभरी हुई परतें
यमुना और टोंस के बीच जल-विभाजक (प्रश्न पूछा गया)

3. भांडेर पर्वत श्रृंखला (Bhander Range)

विंध्य पर्वतमाला का पूर्वी भाग।
विशेषताएँ
क्षेत्र: पन्ना, छतरपुर, दतिया
औसत ऊँचाई: 500 मीटर
ढाल: पश्चिम → पूर्व
रचना: कैम्ब्रियन युग के निक्षेप
मुख्य चोटी
सिद्ध-बाबा चोटी (1172 मीटर)
बुंदेलखंड की सबसे ऊँची
MP की दूसरी सबसे ऊँची चोटी

4. सतपुड़ा–मैकाल पर्वत श्रृंखला (Satpura-Maikal Range)

मध्यप्रदेश की सबसे प्रमुख पर्वतमाला सतपुड़ा है, जिसे ‘मध्य भारत का पर्वतीय कश्मीर’ भी कहा जाता है। यह मालवा के पठार से शुरू होकर पूर्व में छत्तीसगढ़ तक फैली हुई है। सतपुड़ा का अधिकांश हिस्सा मध्यप्रदेश में ही आता है और यहाँ की महत्वपूर्ण चोटियाँ इसी पर्वतमाला से संबंधित हैं।
(क) धूपगढ़ – 1350 मीटर (MP की सबसे ऊँची चोटी)
स्थान : पचमढ़ी, महादेव हिल
धूपगढ़ मध्यप्रदेश की सर्वोच्च चोटी है।
पचमढ़ी क्षेत्र को “सतपुड़ा की रानी” भी कहा जाता है।
धूपगढ़ से निकलने वाली सूर्यास्त और सूर्योदय की दृश्यावलियाँ अत्यंत प्रसिद्ध हैं।
यहाँ का जैव-विविधता क्षेत्र सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का भाग है।
(ख) महादेव हिल्स
धूपगढ़ के आसपास स्थित पर्वतीय क्षेत्र को महादेव हिल कहा जाता है।
पचमढ़ी के महादेव मंदिर, पांडव गुफाएँ तथा यहां का आदिवासी सांस्कृतिक इतिहास इसे और भी विशिष्ट बनाता है।

मुख्य विशेषताएँ

औसत ऊँचाई : 700 मीटर
रचना : ग्रेनाइट और बेसाल्ट
जल-विभाजक : नर्मदा और महानदी के बीच

पर्वतीय क्षेत्रों का जैव विविधता महत्व

मध्यप्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र वन्यजीवों, औषधीय पौधों और प्राकृतिक पारिस्थितिक संतुलन के प्रमुख केंद्र हैं।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व
पेंच राष्ट्रीय उद्यान
अमरकंटक बायोस्फियर रिजर्व
कान्हा, बांधवगढ़ आदि संरक्षित क्षेत्र पर्वतीय भू-आकृति से प्रभावित हैं।
यह क्षेत्रों में दुर्लभ प्रजातियाँ पाई जाती हैं—
भारतीय बाघ
गौर
चार सींग वाला हिरण
काला हिरण
जंगली कुत्ता
दुर्लभ पक्षी जैसे मालाबार पाइड हॉर्नबिल>

सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व

मध्यप्रदेश का पर्वतीय क्षेत्र सदियों से आध्यात्मिक और सभ्यतागत केंद्र रहा है।
पचमढ़ी की पांडव गुफाएँ
अमरकंटक का धार्मिक महत्व
विंध्य क्षेत्रों में प्राचीन गुफाएँ और मंदिर
भीमबेटका शैलाश्रय (विश्व धरोहर)
मालवा के पठार पर प्राचीन नगर और जनजातीय संस्कृति
ये सभी पर्वतीय क्षेत्र मानव सभ्यता के प्राचीन इतिहास को दर्शाते हैं।

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