राइट टू डिसकनेक्ट बिल 2025

1. विधेयक का उद्देश्य

लोकसभा में पेश किया गया ‘राइट टू डिस्कनेक्ट बिल 2025’ कर्मचारियों को कार्य समय के बाद काम से जुड़े कॉल, ईमेल या संदेशों का जवाब देने की बाध्यता से मुक्त करने हेतु बनाया गया है। इसका प्रमुख लक्ष्य कर्मचारियों के कार्य-जीवन संतुलन को बेहतर करना है।

2. मुख्य प्रावधान

कर्मचारी कल्याण प्राधिकरण की स्थापना
यह प्राधिकरण 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में राइट टू डिस्कनेक्ट लागू करने, अध्ययन करने और कार्य समय के बाद काम से संबंधित नियमों पर दिशा-निर्देश तय करने का कार्य करेगा।

कार्य समय के बाद जवाब न देने का अधिकार
कर्मचारी यदि निर्धारित कार्य समय के बाद संवाद करने से इनकार करते हैं, तो उन पर किसी भी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकेगी।

ओवरटाइम के लिए अनिवार्य भुगतान
यदि किसी कर्मचारी से निर्धारित समय से अधिक कार्य लिया जाता है, तो नियोक्ता को ओवरटाइम वेतन देना अनिवार्य होगा।

मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
टेली-प्रेशर, तनाव और इन्फो-ओबेसिटी जैसी समस्याओं से निपटने के लिए परामर्श सेवाएं

डिजिटल डिटॉक्स केंद्र
स्थापित करने का प्रस्ताव भी विधेयक में शामिल है।

3. वैश्विक संदर्भ

फ्रांस, पुर्तगाल और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में राइट टू डिस्कनेक्ट पहले से लागू है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कर्मचारी कल्याण के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।

4. निजी सदस्य विधेयक (Private Member’s Bill) क्या है?

यह ऐसा विधेयक होता है, जिसे किसी मंत्री के अलावा संसद सदस्य द्वारा पेश किया जाता है। ऐसे विधेयक संसद में आमतौर पर शुक्रवार को चर्चा के लिए लाए जाते हैं। भारत में निजी सदस्य विधेयक बहुत कम पारित हो पाते हैं— स्वतंत्रता के बाद से अभी तक केवल 14 PMB ही दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त कर पाए हैं। 1970 के बाद से एक भी निजी सदस्य विधेयक पारित नहीं हुआ।

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