दिल्ली वायु प्रदूषण संकट 2025

दिल्ली में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर होता जा रहा है। स्थानीय वाहनों, उद्योगों और कचरा जलाने से निकलने वाला धुआँ, साथ ही पड़ोसी राज्यों से आने वाला प्रदूषण, राजधानी की हवा को जहरीला बना रहा है। सर्दियों के मौसम में हवा की गति धीमी हो जाती है और नमी बढ़ जाती है, जिससे प्रदूषक वातावरण में फँस जाते हैं। इस कारण एयर क्वालिटी इंडेक्स खराब से गंभीर श्रेणी में बना रहता है, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।

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दिल्ली वायु प्रदूषण संकट 2025

दिल्ली वायु प्रदूषण संकट 2025 दिल्ली में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर होता जा रहा है। स्थानीय वाहनों, उद्योगों और कचरा जलाने से निकलने वाला धुआँ,

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पृष्ठभूमि

दिल्ली में प्रदूषण के प्रमुख कारणों में स्थानीय स्रोत सबसे अधिक जिम्मेदार हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआँ, औद्योगिक इकाइयों का उत्सर्जन, लकड़ी और गोबर के उपलों सहित कचरा जलाना, बड़े पैमाने पर हो रहे निर्माण कार्य और सड़कों की धूल प्रदूषण को बढ़ाते हैं। बाहरी स्रोतों की बात करें तो पराली जलाने का योगदान पहले की तुलना में कम हुआ है, लेकिन झज्जर जैसे पड़ोसी शहरों में स्थित थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाला धुआँ अब भी दिल्ली की हवा को प्रभावित करता है। इसके अलावा सर्दियों में ठंडी हवा नीचे जम जाती है, जिसे बाउल-इफेक्ट कहा जाता है, जिससे प्रदूषक बाहर नहीं निकल पाते और स्थिति और गंभीर हो जाती है।

प्रदूषण के कारण

दिल्ली में वायु गुणवत्ता की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। हाल ही में राजधानी का AQI 329 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में तेज़ हवाओं और कोहरे में कमी के कारण प्रदूषण के स्तर में थोड़ी राहत देखने को मिली है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार 301 से 400 के बीच AQI को बहुत खराब और 401 से 500 के बीच गंभीर माना जाता है। इसके बावजूद राजधानी के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता अब भी स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित बनी हुई है।

प्रदूषण के प्रभाव

वायु प्रदूषण का सीधा और गंभीर प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सांस लेने में दिक्कत, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी श्वसन संबंधी बीमारियाँ बढ़ रही हैं, वहीं हृदय रोग और फेफड़ों के कैंसर का खतरा भी बढ़ गया है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर इसका असर अधिक देखने को मिल रहा है। इसके अलावा स्मॉग के कारण दृश्यता कम होने से हवाई और रेल परिवहन प्रभावित हो रहा है, उड़ानों और ट्रेनों में देरी हो रही है तथा सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में भी वृद्धि देखी जा रही है।

सरकार के उपाय

बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने कई सख्त कदम उठाए हैं। सरकार ने सभी सरकारी और निजी दफ्तरों के लिए 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य कर दिया है, ताकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम हो और प्रदूषण नियंत्रित किया जा सके। इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के तहत GRAP-IV लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत निर्माण कार्यों पर रोक, गैर-जरूरी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और PUC सर्टिफिकेट न रखने वाले वाहनों को ईंधन न देने जैसे कदम शामिल हैं।

निर्माण मजदूरों को राहत

GRAP-3 के तहत निर्माण कार्यों पर लगी रोक से प्रभावित पंजीकृत निर्माण मजदूरों को दिल्ली सरकार ने आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है। सरकार प्रत्येक मजदूर को 10,000 रुपये की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर करेगी। कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा के अनुसार करीब 16 दिनों तक निर्माण कार्य बंद रहने से मजदूरों की आजीविका प्रभावित हुई थी, इसलिए यह राहत प्रदान की जा रही है और आगे भी इसी आधार पर सहायता दी जाएगी।

मौसम की भूमिका

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में दिन भर हल्का से मध्यम कोहरा बना रह सकता है। राजधानी में अधिकतम तापमान लगभग 24 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 10 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। स्मॉग में कमी आने से सुबह के समय दृश्यता में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन मौसम की मौजूदा स्थिति प्रदूषण को पूरी तरह फैलने से रोकने में अब भी सहायक नहीं है।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केवल अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए क्षेत्रीय स्तर पर सभी राज्यों के बीच समन्वय, प्रदूषण के बदलते स्रोतों पर ध्यान और सख्त नियमों के प्रभावी पालन की आवश्यकता है। साथ ही अरावली क्षेत्र में खनन जैसी गतिविधियों पर नियंत्रण और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देकर ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।

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