एस-400 मिसाइल प्रणाली

संदर्भ -

हाल ही में रूसी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि रूस 2025–2026 तक भारत को एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की शेष इकाइयाँ सौंप देगा। भारत पहले ही चार एस-400 स्क्वाड्रन तैनात कर चुका है, जिनमें पठानकोट, राजस्थान और गुजरात जैसे महत्वपूर्ण सैन्य क्षेत्र शामिल हैं। इससे भारत की वायु सुरक्षा क्षमता कई गुना मजबूत हुई है।

अन्य प्रणालियों पर श्रेष्ठता

→ Patriot (USA) के मुकाबले
तैनाती समय:
S-400 – 5 मिनट
Patriot – 25 मिनट
रेंज:
S-400 – 400 किमी
Patriot – 180 किमी
इंटरसेप्शन गति:
S-400 – 4.8 किमी/सेकंड
Patriot – 1.38 किमी/सेकंड
→ THAAD के मुकाबले
THAAD केवल एक प्रकार की मिसाइल दागता है (रेंज 150–200 किमी)
S-400 चार प्रकार की मिसाइलों के साथ बहु-स्तरीय सुरक्षा देता है

भारत–रूस अनुबंध (2018)

अमेरिका के CAATSA प्रतिबंधों के जोखिम के बावजूद भारत ने 2018 में रूस के साथ पाँच एस-400 स्क्वाड्रनों के लिए 35,000 करोड़ रुपये से अधिक का समझौता किया था। रूस अब तक तीन इकाइयाँ सौंप चुका है, जिनमें पहली इकाई 2021 में दी गई थी। शेष दो स्क्वाड्रन 2025–2026 के बीच मिलने की उम्मीद है।

एस-400 मिसाइल प्रणाली क्या है?

एस-400 ट्रायम्फ रूस द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक सतह-से-हवा (SAM) मिसाइल प्रणाली है। इसे विभिन्न हवाई खतरों—लड़ाकू विमान, बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल व UAV—को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस प्रणाली में शामिल हैं:
बहुक्रियाशील रडार
स्वचालित कमांड सेंटर
चार श्रेणी की मिसाइलें
मोबाइल लॉन्चर

प्रमुख क्षमता (Capabilities)

अधिकतम रेंज: 400 किमी
ऊँचाई कवरेज: 10 मीटर से 30 किमी
ट्रैकिंग क्षमता: 80 लक्ष्यों पर नज़र
एंगेजमेंट क्षमता: एक बार में 36 लक्ष्यों पर हमला
इंटरसेप्शन गति: 4.8 किमी प्रति सेकंड (अत्यंत तेज़ गति से आने वाले खतरों को भी रोकने योग्य)

मिसाइलों के प्रकार

सिस्टम चार अलग-अलग दूरी की मिसाइलों का उपयोग करता है:
40N6 – 400 किमी (लंबी दूरी):
48N6 – 250 किमी (मध्यम दूरी):
9M96E2 – 120 किमी (छोटी–मध्यम दूरी):
9M96E – 40 किमी (कम दूरी):
ये विभिन्न रेंज मिलकर एक बहु-स्तरीय वायु रक्षा कवच बनाते हैं।:

रडार और कमांड सिस्टम

एस-400 की रडार प्रणाली में विभिन्न दूरी के लक्ष्यों का पता लगाने की क्षमता है। मुख्य रडार हैं:
91N6E 'Big Bird': लंबी दूरी का 3D phased-array रडार
92N6E 'Grave Stone': मिसाइल गाइडेंस और मध्यम–कम दूरी के लक्ष्यों का सटीक पता लगाना
55K6E Command Module: रडार और लॉन्चर के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया सक्षम

गतिशीलता (Mobility)

एस-400 ट्रकों पर आधारित है, जिसे किसी भी प्रकार के भूभाग में तेजी से पुनः तैनात किया जा सकता है।
तैनाती समय: मात्र 5 मिनट
यह तेज़ी युद्ध के दौरान अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होती है।

भारत में उपयोगिता और तैनाती

भारत एस-400 को अपनी वायु रक्षा रणनीति का मुख्य आधार बना रहा है।
इसका उपयोग चीन और पाकिस्तान से संभावित हवाई व मिसाइल खतरों को रोकने में होगा।
इसे पूर्वोत्तर, पश्चिमी सीमा और समुद्री क्षेत्रों में भी तैनात किया जाएगा।
ये प्रणालियाँ दुश्मन के हवाई लक्ष्यों की पूर्व चेतावनी + सटीक निशाना सुनिश्चित करती हैं।

भारत के पास कितने S-400 स्क्वाड्रन हैं?

भारत के पास वर्तमान में तीन ऑपरेशनल स्क्वाड्रन हैं।
2026 तक दो और मिलने की उम्मीद, कुल संख्या 5 हो जाएगी।

क्या चीन के पास S-400 है?

हाँ, रूस ने चीन को एस-400 सौंपा है, हालांकि चीन ने इसकी कुछ सीमाएँ भी बताई हैं।

क्या S-400 आयरन डोम से बेहतर है?

S-400 — लंबी दूरी, विविध खतरों के लिए उत्तम और अत्यधिक उन्नत Iron Dome — केवल छोटी दूरी के रॉकेट अवरोधन के लिए प्रभावी → कुल मिलाकर S-400 ज्यादा बहुमुखी है।

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