देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस सूर्यकांत

देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस सूर्यकांत


भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश: न्यायमूर्ति सूर्यकांत

न्यायमूर्ति सूर्यकांत को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में नियुक्त किया गया है। उन्होंने न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण (B.R.) गवई का स्थान लिया है। यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद केंद्रीय विधि मंत्रालय के न्याय विभाग द्वारा अधिसूचित की गई।


भारत के मुख्य न्यायाधीश: प्रमुख प्रावधान

1. नियुक्ति

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, जिनमें मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं, की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 124(2) के अंतर्गत की जाती है।

सेवानिवृत्त होने वाले CJI परंपरा के अनुसार वरिष्ठतम न्यायाधीश की अगले CJI के रूप में अनुशंसा करते हैं (यह केवल प्रथा है, कानूनी आवश्यकता नहीं)।


2. योग्यता

CJI बनने के लिए व्यक्ति को—

भारत का नागरिक होना चाहिए।

उच्च न्यायालय में 5 वर्ष न्यायाधीश या

उच्च न्यायालय में 10 वर्ष अधिवक्ता, या

राष्ट्रपति की राय में एक प्रतिष्ठित न्यायविद् होना चाहिए।


3. कार्यकाल

CJI का कार्यकाल 65 वर्ष की आयु तक सीमित होता है।

कोई निश्चित अवधि निर्धारित नहीं, यह नियुक्ति और सेवानिवृत्ति की तिथि पर निर्भर करता है।


4. पद से हटाया जाना

CJI को केवल राष्ट्रपति द्वारा,

संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव के बाद ही हटाया जा सकता है।



न्यायमूर्ति सूर्यकांत: जीवन परिचय एवं शिक्षा

जन्म: 10 फरवरी 1962, हिसार (हरियाणा), मध्यमवर्गीय परिवार में।

स्नातक: 1981, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हिसार।

विधि स्नातक (LLB): 1984, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक।

मास्टर ऑफ लॉ (LLM): 2011, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (प्रथम श्रेणी)।



कानूनी करियर की शुरुआत

1984: हिसार जिला न्यायालय में वकालत आरंभ।

1985: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस हेतु चंडीगढ़ स्थानांतरित।

विशेषज्ञता: संवैधानिक, सेवा एवं सिविल मामलों में।

कई विश्वविद्यालयों, बोर्डों, निगमों, बैंकों तथा स्वयं उच्च न्यायालय का प्रतिनिधित्व किया।




महत्वपूर्ण पद व उपलब्धियाँ

7 जुलाई 2000: हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल बने।

मार्च 2001: वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) नामित।

09 जनवरी 2004: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश नियुक्त।

23 फरवरी 2007 – 22 फरवरी 2011: दो कार्यकालों तक NALSA (राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण) के शासी निकाय के सदस्य।

भारतीय विधि संस्थान (ILI) की अनेक समितियों के सदस्य।

कई राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय कानूनी सम्मेलनों में सहभागिता एवं आयोजन।



सर्वोच्च न्यायालय में योगदान


24 मई 2019: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने।

NALSA के कार्यकारी अध्यक्ष और SCLSC (सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विस कमेटी) के अध्यक्ष रहे।

उनके कई फैसले देशभर में चर्चा का विषय बने।



मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल

24 नवंबर 2025: भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण।

09 फरवरी 2027:
सेवानिवृत्ति की निर्धारित तिथि।

जस्टिस सूर्यकांत अब भारत के 53वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं।

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