कोशिका
कोशिका सजीवों के शरीर की मूल, रचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है। यह जीवन की सबसे छोटी इकाई है जो स्वतंत्र रूप से जीवन की सभी प्रक्रियाओं, जैसे चयापचय और प्रजनन, को कर सकती है। कोशिकाओं से एककोशिकीय जीव (जैसे जीवाणु) और बहुकोशिकीय जीव (जैसे मनुष्य) बनते हैं। कोशिका के अध्ययन को कोशिका विज्ञान (साइटोलॉजी) कहा जाता है। कोशिका के मुख्य कार्य

1. ऊर्जा का उत्पादन (Energy Production)


कोशिका का सबसे महत्वपूर्ण कार्य ऊर्जा का निर्माण करना है।

यह कार्य मुख्य रूप से माइटोकांड्रिया (Mitochondria) नामक कोशिकांग में होता है,
जिसे कोशिका का 'ऊर्जा गृह' (Power House) भी कहते हैं।

यह श्वसन की प्रक्रिया द्वारा भोजन से ATP (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) के रूप में ऊर्जा मुक्त करता है, जिसका उपयोग शरीर की सभी जैविक क्रियाओं में होता है।

2. पदार्थों का संश्लेषण (Synthesis of Substances)


कोशिका अपनी आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न जैविक पदार्थों का निर्माण करती
है।
प्रोटीन संश्लेषण: राइबोसोम (Ribosomes) प्रोटीन का निर्माण करते हैं, जो शरीर की संरचना और एंजाइम के रूप में कार्य करने के लिए आवश्यक हैं।
वसा और लिपिड संश्लेषण: चिकनी अंतर्प्रद्रव्यी जालिका (Smooth
Endoplasmic Reticulum) वसा (Fats) और लिपिड (Lipids) का संश्लेषण करती है।
स्रावण (Secretion): गॉल्जी काय (Golgi Apparatus) संश्लेषित पदार्थों को पैक करता है और उन्हें कोशिका के अंदर या बाहर स्रावित (Secret) करता है।
3. आनुवंशिक जानकारी का नियंत्रण (Control of Genetic Information) कोशिका के केंद्रक (Nucleus) में DNA (आनुवंशिक सामग्री) होता है।

केंद्रक कोशिका के सभी कार्यों को नियंत्रित करता है और यह सुनिश्चित करता है कि कोशिका का विभाजन (Division) और कार्य DNA में निहित जानकारी के अनुसार हो।

यह आनुवंशिक सूचना को अगली पीढ़ी की कोशिकाओं तक पहुँचाता है।

4. निर्वासन और मृत्यु

• सिकंदर महान की मृत्यु (323 ईसा पूर्व) के बाद, एथेंस में मैसेडोनिया-विरोधी भावना बढ़ गई। अरस्तु पर भी "अधर्म" का आरोप लगाया गया।

• सुकरात जैसी नियति से बचने के लिए, अरस्तु ने स्वेच्छा से एथेंस छोड़ दिया और चालसिस चले गए, जहाँ उन्होंने कहा कि वह एथेनियाई लोगों को दर्शन के खिलाफ "दूसरी बार पाप" करने का मौका नहीं देंगे।

• अगले ही वर्ष, 322 ईसा पूर्व में उनकी मृत्यु हो गई।

अरस्तु का दर्शन और प्रमुख सिद्धांत

अरस्तु का दर्शन उनके गुरु प्लेटो के प्रत्यय सिद्धांत (Theory of Forms) को अस्वीकार करता है। प्लेटो ने माना कि सच्ची वास्तविकता अमूर्त विचारों या 'रूपों' में निहित है, जबकि अरस्तु ने ज़ोर दिया कि सच्ची वास्तविकता भौतिक दुनिया में निहित है, जिसे हम अवलोकन और अनुभव से जान सकते हैं।

1. तर्कशास्त्र का जनक

• अरस्तु को तर्कशास्त्र (Logic) का संस्थापक माना जाता है।

• न्यायवाक्य (Syllogism): यह उनके तर्कशास्त्र का केंद्रीय तत्व है। यह तीन भागों वाला एक तार्किक तर्क है: दो आधार वाक्य (Premises) और एक निष्कर्ष (Conclusion)।

• उदाहरण: सभी मनुष्य नश्वर हैं (आधार 1)। सुकरात मनुष्य है (आधार 2)। अतः, सुकरात नश्वर है (निष्कर्ष)।

• उनके तर्कशास्त्र पर सदियों तक पश्चिमी और इस्लामी दर्शन का प्रभुत्व रहा।
2. तत्वमीमांसा (Metaphysics)

• चार कारण (Four Causes): अरस्तु का मानना था कि किसी भी वस्तु को पूरी तरह से समझने के लिए, उसके चार कारणों को जानना आवश्यक है:

1. भौतिक कारण (Material Cause): वह सामग्री जिससे वस्तु बनी है (जैसे- मूर्ति का पत्थर)।

2. स्वरूप कारण (Formal Cause): वह रूप या सार जो वस्तु को बनाता है (जैसे- मूर्ति का डिज़ाइन)।

3. निमित्त कारण (Efficient Cause): वह चीज़ जिसने वस्तु को बनाया (जैसे- मूर्तिकार)।

4. अंतिम कारण (Final Cause) / प्रयोजन: वस्तु का उद्देश्य या लक्ष्य (जैसे- पूजा या प्रदर्शन के लिए)।

• शक्ति (Potency) और वास्तविकता (Actuality): यह सिद्धांत बताता है कि हर वस्तु में कुछ बनने की शक्ति (संभावना) होती है, और जब वह उस उद्देश्य को प्राप्त कर लेती है, तो वह वास्तविकता बन जाती है।

3. नीतिशास्त्र (Ethics)

• निकॉमैकियन एथिक्स (Nicomachean Ethics): यह उनकी सबसे महत्त्वपूर्ण नैतिक कृति है।

• यूडिमोनिया (Eudaimonia): अरस्तु के अनुसार, मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य यूडिमोनिया है, जिसे अक्सर "खुशहाली," "समृद्धि," या "उत्कृष्ट जीवन" के रूप में अनुवादित किया जाता है।

• स्वर्ण मध्य मार्ग (Golden Mean): यूडिमोनिया प्राप्त करने का मार्ग सद्गुण (Virtue) है, जो दो अतिवादी बुराइयों (अभाव और अतिरेक) के बीच का मध्य मार्ग होता है।

• उदाहरण: कायरता (अभाव) और उतावलापन (अतिरेक) के बीच का सद्गुण साहस है।

4. राजनीति (Politics)

• उन्हें राजनीति विज्ञान का जनक माना जाता है।

• "मनुष्य स्वभाव से एक राजनीतिक पशु है" ("Man is by nature a political animal")। उनका मानना था कि मनुष्य स्वाभाविक रूप से समुदायों (राज्य या पोलिस) में रहते हैं और सबसे अच्छे जीवन के लिए राज्य आवश्यक है।

• राज्य का उद्देश्य: राज्य का उद्देश्य केवल जीवन की रक्षा करना नहीं, बल्कि नागरिकों के लिए एक अच्छा जीवन सुनिश्चित करना है।

• सर्वश्रेष्ठ शासन: उन्होंने तीन तरह के शासन (राजतंत्र, अभिजाततंत्र, पॉलिटी) को सही माना और उनके विकृत रूपों (तानाशाही, गुटतंत्र, लोकतंत्र) की आलोचना की। उन्होंने 'पॉलिटी' (संवैधानिक गणराज्य) को सर्वश्रेष्ठ व्यावहारिक शासन माना।

5. जीव विज्ञान (Biology)

• अरस्तु को जीव विज्ञान और जंतु विज्ञान (Zoology) का जनक माना जाता है।

• उन्होंने लगभग 500 विभिन्न प्रजातियों के जानवरों का अवलोकन और वर्गीकरण किया।

• वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने जानवरों को एक व्यवस्थित तरीके से वर्गीकृत करने का प्रयास किया।

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